तुम्हारा दफनाया लिफाफा।

कपड़ो के रखे झुंड के
नीचे एक लिफाफा मिला
हां वही लिफाफा जिसमें तुम्हारा लंबा चौड़ा खत रखा हैं।

वहीं खत जो तुमने मुझे हमारी पहली मुलाक़ात के आखिर में दिया था।

याद तो हैं न?

रात के सायेें दबी, छुपी हुई रोशनी में
वो खत पढ़ना चाहा मैनें
मगर हमारे बीच की दीवारों ने
मुझे मजबूर कर दिया उन्हें वहीं रखने पर
जहां एक अरसे से वो दफन हुए पड़े हैं।

आखिर ज्यादा कोई फर्क भी तो नहीं रहा उन कागजों और हमारे बीच में…

दोनों ही फीके पड़ गए वक़्त के साथ।

-SumitOfficial


PS: Originally written on my journal on January 11, 2019. Thank you for reading. 🙂

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11 thoughts on “तुम्हारा दफनाया लिफाफा।”

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