जिक्र… आज भी बस तुम्हारा।

शोर… हाँ तुम्हारी आवाज़ का शोर आज भी तो वैसे ही गूजँता हैं मेरे कानो में जैसे आधी रातों तक यूँ ही सुबह होने के इंतज़ार के साथ हमारी फोन पर बातें ख़त्म हुआ करती थी.. कितनी जूठी थी ना सब की सब।

किसने सोचा था की जिस किताब को इस बेताबी से पढ़े जा रहे थे उसके पन्ने शुरू होने के पहले ही ख़तम हो जायेंगे.. काश.. की तुम उस हार्डकवर बुक के कवर की तरह होती, तुम्हें बस सवारां होता.. बिन खोले.. बिन पढे बस निहारां होता।

बेशक आज भी तुम मुझसे दूर नहीं गयी हो, हां खो जरूर गयी हो भीड़ में कही की आने का नाम ही नहीं लेती…

याद आती हैं मेरी?

सुनो! नहीं आनी चाहिए, आखिर अब हम वो जो न रहे जो कभी होने वाले थे न…एक दूसरे के।

मगर, मेरी जान, कभी यह सोच कर उदास न होना की तुमने मुझे खोया हैं, तुम मेरी पहली मोहब्बत थी और भला पहली मोहब्बत को कोई कभी भूल पाया हैं क्या?

तुम आज भी बसर करती हो मेरे जहन में, कुछ इस तरह की तुम्हारे प्यार का बयां में जहान भर में करता फिरता हूँ, तुमसे इश्क़ करके सबसे कहता हूँ, तुम चाहे दूर हो आज मुझसे, मगर मेरी लिखावट में तुम सिमटी हुई हो, और हर पढ़ने वाला देता हैं सदा की तुम कितनी खुशकिस्मत हो की तुम्हे में मिला।

और मैं? मैं इन सबसे दूर कही तुम्हारी यादों में पड़ा..लिखता हुआ तुम्हारे होने का एह्साह मेरे पास कही… हाँ यही इश्क़ हैं जो सबको मुझसे हुआ, और मुझे हुआ तुमसे।

मेरी लिखावट से लोगों ने मोहब्बत

शायद इसलिए भी कि

क्योंकि…

उन तमाम प्यार के किस्सों में

आज भी जिक्र बस तुम्हारा होता हैं।

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41 thoughts on “जिक्र… आज भी बस तुम्हारा।”

  1. Bohotttt hi khubsoorat rachna! Dil ko chhu gayi aapki kavita. Ye panktiyaan kitni sundar hain.
    “काश.. की तुम्हें उस हार्डकवर बुक के कवर की तरह होती, तुम्हें बस सवारां होता.. बिन खोले.. बिन बढे बस निहारां होता।” 😞♥️ Likhte rahiye ji.

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  2. This was something else! Every word touched a nerve and struck a chord. Laga ki apna dil khol k rakh diya hai bas. Beautifully written, beautifully portrayed. Just when I have seen the best of your work, you go ahead and do this – leaves me dumbfounded. Take a bow Mr. Sumit 🙌🏼

    Liked by 2 people

    1. An open-hearted person, maybe that’s one of the reasons why I have just written the entire post in less than 8-10 min before leaving from my office last night.

      I do that many of the times, and mostly, k don’t post them anywhere at all. After all, a few things are best kept secrets. But your view on this made me feel really happy. 🌼

      Rukshi, thank you so much for your lovely appreciations. 🤗💕

      Liked by 1 person

  3. A one year old post, but I am sure, the feelings must be the same. “मेरी लिखावट से लोगों ने मोहब्बत
    शायद इसलिए भी कि क्योंकि…उन तमाम प्यार के किस्सों में…आज भी जिक्र बस तुम्हारा होता हैं।” Waah! Acha matlab that is why your handwriting is so good. Got the connection! 😀

    Liked by 1 person

    1. Hahaha! Is it?
      Aap bolte ho to man na padega. After all, I’ve an expert with me. 😋

      And yes, kissa purana hain, Nanchi, magar dil ke bahut kareeb.

      Hum writers ka bhi na bahut galat usool hain, agar kisi chiz par likhna hain na to usme ghus jayenge pure. Chahe wo aag ho, ya logon ka diya dhokha.

      Aur fir jo nillega, wo hoga sona, jo hum likh ke bayaan karte hain.

      Liked by 1 person

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